1-Balkand / Sarga 38
Shloka 21
Shloka
प्रक्षिप्य प्राहसन्नित्यं मज्जतस्तान् निरीक्ष्य वै ।एवं पापसमाचारः सज्जनप्रतिबाधकः ॥१-३८-२१॥
Sarga 38 / Shloka 21 Balkand