1-Balkand / Sarga 38
Shloka 20
Shloka
स च ज्येष्ठो नरश्रेष्ठ सगरस्यात्मसम्भवः ।बालान् गृहीत्वा तु जले सरय्वा रघुनन्दन ॥१-३८-२०॥
Sarga 38 / Shloka 20 Balkand