1-Balkand / Sarga 38
Shloka 15
Shloka
प्रदक्षिणमृषिं कृत्वा शिरसाभिप्रणम्य तम् ।जगाम स्वपुरं राजा सभार्यो रघुनन्दन ॥१-३८-१५॥
Sarga 38 / Shloka 15 Balkand