1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 38 / Shloka 12 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 38
Shloka 12

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/38/12
1-Balkand / Sarga 38 Shloka 12
Shloka
एको वंशकरो वास्तु बहवो वा महाबलाः ।
कीर्तिमन्तो महोत्साहाः का वा कं वरमिच्छति ॥१-३८-१२॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘उन दोनोंकी यह बात सुनकर परम धर्मात्मा भृगुने उत्तम वाणीमें कहा—‘देवियो! तुमलोग यहाँ अपनी इच्छा प्रकट करो। तुम्हें वंश चलानेवाला एक ही पुत्र प्राप्त हो अथवा महान् बलवान्, यशस्वी एवं अत्यन्त उत्साही बहुत-से पुत्र? इन दो वरोंमेंसे किस वरको कौन-सी रानी ग्रहण करना चाहती है?’॥ ११-१२॥