1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 38 / Shloka 11 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 38
Shloka 11

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/38/11
1-Balkand / Sarga 38 Shloka 11
Shloka
तयोस्तद् वचनं श्रुत्वा भृगुः परमधार्मिकः ।
उवाच परमां वाणीं स्वच्छन्दोऽत्र विधीयताम् ॥१-३८-११॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘उन दोनोंकी यह बात सुनकर परम धर्मात्मा भृगुने उत्तम वाणीमें कहा—‘देवियो! तुमलोग यहाँ अपनी इच्छा प्रकट करो। तुम्हें वंश चलानेवाला एक ही पुत्र प्राप्त हो अथवा महान् बलवान्, यशस्वी एवं अत्यन्त उत्साही बहुत-से पुत्र? इन दो वरोंमेंसे किस वरको कौन-सी रानी ग्रहण करना चाहती है?’॥ ११-१२॥