1-Balkand / Sarga 37
Shloka 17
Shloka
इह हैमवते पार्श्वे गर्भोऽयं संनिवेश्यताम् ।श्रुत्वा त्वग्निवचो गङ्गा तं गर्भमतिभास्वरम् ॥१-३७-१७॥
Sarga 37 / Shloka 17 Balkand