1-Balkand / Sarga 37
Shloka 14
Shloka
समन्ततस्तदा देवीमभ्यषिञ्चत पावकः ।सर्वस्रोतांसि पूर्णानि गङ्गाया रघुनन्दन ॥१-३७-१४॥
Sarga 37 / Shloka 14 Balkand