1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 36 / Shloka 8 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 36
Shloka 8

Balkand

77 Sarga
27 Shloka
1/36/8
1-Balkand / Sarga 36 Shloka 8
Shloka
यदिहोत्पद्यते भूतं कस्तत् प्रतिसहिष्यति ।
अभिगम्य सुराः सर्वे प्रणिपत्येदमब्रुवन् ॥१-३६-८॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘उन्होंने सोचा—इतने दीर्घकालके पश्चात् यदि रुद्रके तेजसे उमादेवीके गर्भसे कोई महान् प्राणी प्रकट हो भी जाय तो कौन उसके तेजको सहन करेगा? यह विचारकर सब देवता भगवान् शिवके पास जा उन्हें प्रणाम करके यों बोले—॥ ८॥