1-Balkand / Sarga 36
Shloka 4
Shloka
त्रिषु लोकेषु धर्मज्ञ कर्मभिः कैः समन्विता ।तथा ब्रुवति काकुत्स्थे विश्वामित्रस्तपोधनः ॥१-३६-४॥
Sarga 36 / Shloka 4 Balkand