1-Balkand / Sarga 36
Shloka 3
Shloka
त्रीन् पथो हेतुना केन प्लावयेल्लोकपावनी ।कथं गङ्गां त्रिपथगा विश्रुता सरिदुत्तमा ॥१-३६-३॥
Sarga 36 / Shloka 3 Balkand