1-Balkand / Sarga 36
Shloka 21
Shloka
समन्युरशपत् सर्वान् क्रोधसंरक्तलोचना ।यस्मान्निवारिता चाहं संगता पुत्रकाम्यया ॥१-३६-२१॥
Sarga 36 / Shloka 21 Balkand