1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 36 / Shloka 2 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 36
Shloka 2

Balkand

77 Sarga
27 Shloka
1/36/2
1-Balkand / Sarga 36 Shloka 2
Shloka
धर्मयुक्तमिदं ब्रह्मन् कथितं परमं त्वया ।
दुहितुः शैलराजस्य ज्येष्ठाया वक्तुमर्हसि ।
विस्तरं विस्तरज्ञोऽसि दिव्यमानुषसम्भवम् ॥१-३६-२॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘ब्रह्मन्! आपने यह बड़ी उत्तम धर्मयुक्त कथा सुनायी। अब आप गिरिराज हिमवान्की ज्येष्ठ पुत्री गंगाके दिव्यलोक तथा मनुष्यलोकसे सम्बन्ध होनेका वृत्तान्त विस्तारके साथ सुनाइये; क्योंकि आप विस्तृत वृत्तान्तके ज्ञाता हैं॥ २॥