1-Balkand / Sarga 36
Shloka 16
Shloka
एवमुक्तः सुरपतिः प्रमुमोच महाबलः ।तेजसा पृथिवी येन व्याप्ता सगिरिकानना ॥१-३६-१६॥
Sarga 36 / Shloka 16 Balkand