1-Balkand / Sarga 36
Shloka 14
Shloka
यदिदं क्षुभितं स्थानान्मम तेजो ह्यनुत्तमम् ।धारयिष्यति कस्तन्मे ब्रुवन्तु सुरसत्तमाः ॥१-३६-१४॥
Sarga 36 / Shloka 14 Balkand