1-Balkand / Sarga 35
Shloka 5
Shloka
एवमुक्तस्तु रामेण विश्वामित्रोऽब्रवीदिदम् ।एष पन्था मयोद्दिष्टो येन यान्ति महर्षयः ॥१-३५-५॥
Sarga 35 / Shloka 5 Balkand