1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 35 / Shloka 23 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 35
Shloka 23

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/35/23
1-Balkand / Sarga 35 Shloka 23
Shloka
एतत् ते सर्वमाख्यातं यथा त्रिपथगामिनी ।
खं गता प्रथमं तात गतिं गतिमतां वर ॥१-३५-२३॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘गतिशीलोंमें श्रेष्ठ तात श्रीराम! गंगाजीकी उत्पत्तिके विषयमें ये सारी बातें मैंने तुम्हें बता दीं। ये त्रिपथगामिनी कैसे हुईं? यह भी सुन लो। पहले तो ये आकाशमार्गमें गयी थीं। तत्पश्चात् ये गिरिराजकुमारी गंगा रमणीया देवनदीके रूपमें देवलोकमें आरूढ़ हुई थीं। फिर जलरूपमें प्रवाहित हो लोगोंके पाप दूर करती हुई रसातलमें पहुँची थीं’॥ २३-२४॥