1-Balkand / Sarga 35
Shloka 20
Shloka
या चान्या शैलदुहिता कन्याऽसीद् रघुनन्दन ।उग्रं सुव्रतमास्थाय तपस्तेपे तपोधना ॥१-३५-२०॥
Sarga 35 / Shloka 20 Balkand