1-Balkand / Sarga 35
Shloka 19
Shloka
प्रतिगृह्य त्रिलोकार्थं त्रिलोकहितकांक्षिणः ।गङ्गामादाय तेऽगच्छन् कृतार्थेनान्तरात्मना ॥१-३५-१९॥
Sarga 35 / Shloka 19 Balkand