1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 33 / Shloka 9 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 33
Shloka 9

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/33/9
1-Balkand / Sarga 33 Shloka 9
Shloka
क्षमा यशः क्षमा धर्मः क्षमायां विष्ठितं जगत् ।
विसृज्य कन्याः काकुत्स्थ राजा त्रिदशविक्रमः ॥१-३३-९॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

ककुत्स्थकुलनन्दन श्रीराम! देवतुल्य पराक्रमी राजा कुशनाभने कन्याओंसे ऐसा कहकर उन्हें अन्त:पुरमें जानेकी आज्ञा दे दी और मन्त्रणाके तत्त्वको जाननेवाले उन नरेशने स्वयं मन्त्रियोंके साथ बैठकर कन्याओंके विवाहके विषयमें विचार आरम्भ किया। विचारणीय विषय यह था कि ‘किस देशमें किस समय और किस सुयोग्य वरके साथ उनका विवाह किया जाय?’॥ ९-१०॥