1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 33 / Shloka 6 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 33
Shloka 6

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/33/6
1-Balkand / Sarga 33 Shloka 6
Shloka
क्षान्तं क्षमावतां पुत्र्यः कर्तव्यं सुमहत् कृतम् ।
ऐकमत्यमुपागम्य कुलं चावेक्षितं मम ॥१-३३-६॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘पुत्रियो! क्षमाशील महापुरुष ही जिसे कर सकते हैं, वही क्षमा तुमने भी की है। यह तुमलोगोंके द्वारा महान् कार्य सम्पन्न हुआ है। तुम सबने एकमत होकर जो मेरे कुलकी मर्यादापर ही दृष्टि रखी है—कामभावको अपने मनमें स्थान नहीं दिया है—यह भी तुमने बहुत बड़ा काम किया है॥ ६॥