1-Balkand / Sarga 33
Shloka 22
Shloka
यथाक्रमं तदा पाणिं जग्राह रघुनन्दन ।ब्रह्मदत्तो महीपालस्तासां देवपतिर्यथा ॥१-३३-२२॥
Sarga 33 / Shloka 22 Balkand