1-Balkand / Sarga 33
Shloka 21
Shloka
तमाहूय महातेजा ब्रह्मदत्तं महीपतिः ।ददौ कन्याशतं राजा सुप्रीतेनान्तरात्मना ॥१-३३-२१॥
Sarga 33 / Shloka 21 Balkand