1-Balkand / Sarga 33
Shloka 2
Shloka
वायुः सर्वात्मको राजन् प्रधर्षयितुमिच्छति ।अशुभं मार्गमास्थाय न धर्मं प्रत्यवेक्षते ॥१-३३-२॥
Sarga 33 / Shloka 2 Balkand