1-Balkand / Sarga 33
Shloka 19
Shloka
स राजा ब्रह्मदत्तस्तु पुरीमध्यवसत् तदा ।काम्पिल्यां परया लक्ष्म्या देवराजो यथा दिवम् ॥१-३३-१९॥
Sarga 33 / Shloka 19 Balkand