1-Balkand / Sarga 33
Shloka 15
Shloka
परितुष्टं मुनिं ज्ञात्वा गन्धर्वी मधुरस्वरम् ।उवाच परमप्रीता वाक्यज्ञा वाक्यकोविदम् ॥१-३३-१५॥
Sarga 33 / Shloka 15 Balkand