1-Balkand / Sarga 32
Shloka 6
Shloka
कुशाम्बस्तु महातेजाः कौशाम्बीमकरोत् पुरीम् ।कुशनाभस्तु धर्मात्मा पुरं चक्रे महोदयम् ॥१-३२-६॥
Sarga 32 / Shloka 6 Balkand