1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 32 / Shloka 3 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 32
Shloka 3

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/32/3
1-Balkand / Sarga 32 Shloka 3
Shloka
कुशाम्बं कुशनाभं च असूर्तरजसं वसुम् ।
दीप्तियुक्तान् महोत्साहान् क्षत्रधर्मचिकीर्षया ॥१-३२-३॥

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1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उनके नाम इस प्रकार हैं—कुशाम्ब, कुशनाभ, असूर्तरजस तथा वसु। ये सब-के-सब तेजस्वी तथा महान् उत्साही थे। राजा कुशने ‘प्रजारक्षणरूप’ क्षत्रिय-धर्मके पालनकी इच्छासे अपने उन धर्मिष्ठ तथा सत्यवादी पुत्रोंसे कहा—‘पुत्रो! प्रजाका पालन करो, इससे तुम्हें धर्मका पूरा-पूरा फल प्राप्त होगा’॥ ३-४॥