1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 32 / Shloka 26 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 32
Shloka 26

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/32/26
1-Balkand / Sarga 32 Shloka 26
Shloka
किमिदं कथ्यतां पुत्र्यः को धर्ममवमन्यते ।
कुब्जाः केन कृताः सर्वाश्चेष्टन्त्यो नाभिभाषथ ।
एवं राजा विनिःश्वस्य समाधिं संदधे ततः ॥१-३२-२६॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘पुत्रियो! यह क्या हुआ? बताओ। कौन प्राणी धर्मकी अवहेलना करता है? किसने तुम्हें कुबड़ी बना दिया, जिससे तुम तड़प रही हो, किंतु कुछ बताती नहीं हो।’ यों कहकर राजाने लंबी साँस खींची और उनका उत्तर सुननेके लिये वे सावधान होकर बैठ गये॥ २६॥

Footnote

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें बत्तीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ३२॥