1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 32 / Shloka 23 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 32
Shloka 23

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/32/23
1-Balkand / Sarga 32 Shloka 23
Shloka
तासां तु वचनं श्रुत्वा हरिः परमकोपनः ।
प्रविश्य सर्वगात्राणि बभञ्ज भगवान् प्रभुः ॥१-३२-२३॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उनकी यह बात सुनकर वायुदेव अत्यन्त कुपित हो उठे। उन ऐश्वर्यशाली प्रभुने उनके भीतर प्रविष्टहो सब अंगोंको मोड़कर टेढ़ा कर दिया। शरीर मुड़ जानेके कारण वे कुबड़ी हो गयीं। उनकी आकृति मुट्ठी बँधे हुए एक हाथके बराबर हो गयी। वे भयसे व्याकुल हो उठीं॥ २३॥