1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 32 / Shloka 20 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 32
Shloka 20

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/32/20
1-Balkand / Sarga 32 Shloka 20
Shloka
कुशनाभसुता देव सर्वाः समस्ताः सुरसत्तम ।
स्थानाच्च्यावयितुं देवं रक्षामस्तु तपो वयम् ॥१-३२-२०॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘देव! देवशिरोमणे! हम सब-की-सब राजर्षि कुशनाभकी कन्याएँ हैं। देवता होनेपर भी आपको शाप देकर वायुपदसे भ्रष्ट कर सकती हैं, किंतु ऐसा करना नहीं चाहतीं; क्योंकि हम अपने तपको सुरक्षित रखती हैं॥ २०॥