1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 32 / Shloka 19 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 32
Shloka 19

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/32/19
1-Balkand / Sarga 32 Shloka 19
Shloka
अन्तश्चरसि भूतानां सर्वेषां सुरसत्तम ।
प्रभावज्ञाश्च ते सर्वाः किमर्थमवमन्यसे ॥१-३२-१९॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘सुरश्रेष्ठ! आप प्राणवायुके रूपमें समस्त प्राणियोंके भीतर विचरते हैं (अत: सबके मनकी बातें जानते हैं; आपको यह मालूम होगा कि हमारे मनमें आपके प्रति कोई आकर्षण नहीं है)। हम सब बहिनें आपके अनुपम प्रभावको भी जानती हैं (तो भी हमारा आपके प्रति अनुराग नहीं है); ऐसी दशामें यह अनुचित प्रस्ताव करके आप हमारा अपमान किसलिये कर रहे हैं?॥ १९॥