1-Balkand / Sarga 32
Shloka 15
Shloka
ताः सर्वा गुणसम्पन्ना रूपयौवनसंयुताः ।दृष्ट्वा सर्वात्मको वायुरिदं वचनमब्रवीत् ॥१-३२-१५॥
Sarga 32 / Shloka 15 Balkand