1-Balkand / Sarga 31
Shloka 8
Shloka
तद्धि पूर्वं नरश्रेष्ठ दत्तं सदसि दैवतैः ।अप्रमेयबलं घोरं मखे परमभास्वरम् ॥१-३१-८॥
Sarga 31 / Shloka 8 Balkand