1-Balkand / Sarga 31
Shloka 24
Shloka
भगवन् को न्वयं देशः समृद्धवनशोभितः ।श्रोतुमिच्छामि भद्रं ते वक्तुमर्हसि तत्त्वतः ॥१-३१-२३॥
Sarga 31 / Shloka 24 Balkand