1-Balkand / Sarga 31
Shloka 17
Shloka
तं व्रजन्तं मुनिवरमन्वगादनुसारिणाम् ।शकटीशतमात्रं तु प्रयाणे ब्रह्मवादिनाम् ॥१-३१-१७॥
Sarga 31 / Shloka 17 Balkand