1-Balkand / Sarga 31
Shloka 16
Shloka
इत्युक्त्वा मुनिशार्दूलः कौशिकः स तपोधनः ।उत्तरां दिशमुद्दिश्य प्रस्थातुमुपचक्रमे ॥१-३१-१६॥
Sarga 31 / Shloka 16 Balkand