1-Balkand / Sarga 31
Shloka 11
Shloka
तद्धनुर्नरशार्दूल मैथिलस्य महात्मनः ।तत्र द्रक्ष्यसि काकुत्स्थ यज्ञं च परमाद्भुतम् ॥१-३१-११॥
Sarga 31 / Shloka 11 Balkand