1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 30 / Shloka 23 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 30
Shloka 23

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/30/23
1-Balkand / Sarga 30 Shloka 23
Shloka
सुबाहूरसि चिक्षेप स विद्धः प्रापतद् भुवि ।
शेषान् वायव्यमादाय निजघान महायशाः ।
राघवः परमोदारो मुनीनां मुदमावहन् ॥१-३०-२३॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

लक्ष्मणसे ऐसा कहकर रघुनन्दन श्रीरामने अपने हाथकी फुर्ती दिखाते हुए-से शीघ्र ही महान् आग्नेयास्त्रका संधान करके उसे सुबाहुकी छातीपर चलाया । उसकी चोट लगते ही वह मरकर पृथ्वीपर गिर पड़ा। फिर महायशस्वी परम उदार रघुवीरने वायव्यास्त्र लेकर शेष निशाचरोंका भी संहार कर डाला और मुनियोंको परम आनन्द प्रदान किया॥ २३॥