1-Balkand / Sarga 30
Shloka 22
Shloka
इत्युक्त्वा लक्ष्मणं चाशु लाघवं दर्शयन्निव ।विगृह्य सुमहच्चास्त्रमाग्नेयं रघुनन्दनः ॥१-३०-२२॥
Sarga 30 / Shloka 22 Balkand