1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 30 / Shloka 22 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 30
Shloka 22

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/30/22
1-Balkand / Sarga 30 Shloka 22
Shloka
इत्युक्त्वा लक्ष्मणं चाशु लाघवं दर्शयन्निव ।
विगृह्य सुमहच्चास्त्रमाग्नेयं रघुनन्दनः ॥१-३०-२२॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

लक्ष्मणसे ऐसा कहकर रघुनन्दन श्रीरामने अपने हाथकी फुर्ती दिखाते हुए-से शीघ्र ही महान् आग्नेयास्त्रका संधान करके उसे सुबाहुकी छातीपर चलाया । उसकी चोट लगते ही वह मरकर पृथ्वीपर गिर पड़ा। फिर महायशस्वी परम उदार रघुवीरने वायव्यास्त्र लेकर शेष निशाचरोंका भी संहार कर डाला और मुनियोंको परम आनन्द प्रदान किया॥ २३॥