1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 30 / Shloka 14 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 30
Shloka 14

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/30/14
1-Balkand / Sarga 30 Shloka 14
Shloka
तावापतन्तौ सहसा दृष्ट्वा राजीवलोचनः ।
लक्ष्मणं त्वभिसम्प्रेक्ष्य रामो वचनमब्रवीत् ॥१-३०-१४॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

रक्तके उस प्रवाहसे यज्ञ-वेदीके आस-पासकी भूमिको भीगी हुई देख श्रीरामचन्द्रजी सहसा दौड़े और इधर-उधर दृष्टि डालनेपर उन्होंने उन राक्षसोंको आकाशमें स्थित देखा। मारीच और सुबाहुको सहसा आते देख कमलनयन श्रीरामने लक्ष्मणकी ओर देखकर कहा—॥ १३-१४॥