1-Balkand / Sarga 30
Shloka 14
Shloka
तावापतन्तौ सहसा दृष्ट्वा राजीवलोचनः ।लक्ष्मणं त्वभिसम्प्रेक्ष्य रामो वचनमब्रवीत् ॥१-३०-१४॥
Sarga 30 / Shloka 14 Balkand