1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 30 / Shloka 12 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 30
Shloka 12

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/30/12
1-Balkand / Sarga 30 Shloka 12
Shloka
मारीचश्च सुबाहुश्च तयोरनुचरास्तथा ।
आगम्य भीमसंकाशा रुधिरौघानवासृजन् ॥१-३०-१२॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

जैसे वर्षाकालमें मेघोंकी घटा सारे आकाशको घेरकर छायी हुई दिखायी देती है, उसी प्रकार मारीच और सुबाहु नामक राक्षस सब ओर अपनी माया फैलाते हुए यज्ञमण्डपकी ओर दौड़े आ रहे थे। उनके अनुचर भी साथ थे। उन भयंकर राक्षसोंने वहाँ आकर रक्तकी धाराएँ बरसाना आरम्भ कर दिया॥ ११-१२॥