1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 29 / Shloka 5 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 29
Shloka 5

Balkand

77 Sarga
31 Shloka
1/29/5
1-Balkand / Sarga 29 Shloka 5
Shloka
निर्जित्य दैवतगणान् सेन्द्रान् सहमरुद्गणान् ।
कारयामास तद्राज्यं त्रिषु लोकेषु विश्रुतः ॥१-२९-२५॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

इसकी सिद्धाश्रमके नामसे प्रसिद्धि थी; क्योंकि यहाँ महातपस्वी विष्णुको सिद्धि प्राप्त हुई थी। जब वे तपस्या करते थे, उसी समय विरोचनकुमार राजा बलिने इन्द्र और मरुद्गणोंसहित समस्त देवताओंको पराजित करके उनका राज्य अपने अधिकारमें कर लिया था। वे तीनों लोकोंमें विख्यात हो गये थे॥ ४-५॥