1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 29 / Shloka 27 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 29
Shloka 27

Balkand

77 Sarga
31 Shloka
1/29/27
1-Balkand / Sarga 29 Shloka 27
Shloka
यथार्हं चक्रिरे पूजां विश्वामित्राय धीमते ।
तथैव राजपुत्राभ्यामकुर्वन्नतिथिक्रियाम् ॥१-२९-२५॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

विश्वामित्रजीको आया देख सिद्धाश्रममें रहनेवाले सभी तपस्वी उछलते-कूदते हुए सहसा उनके पास आये और सबने मिलकर उन बुद्धिमान् विश्वामित्रजीकी यथोचित पूजा की। इसी प्रकार उन्होंने उन दोनों राजकुमारोंका भी अतिथि- सत्कार किया॥ २६-२७॥