1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 29 / Shloka 20 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 29
Shloka 20

Balkand

77 Sarga
31 Shloka
1/29/20
1-Balkand / Sarga 29 Shloka 20
Shloka
त्रीन् पदानथ भिक्षित्वा प्रतिगृह्य च मेदिनीम् ।
आक्रम्य लोकाँल्लोकार्थी सर्वलोकहिते रतः ॥१-२९-२५॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

सम्पूर्ण लोकोंके हितमें तत्पर रहनेवाले भगवान् विष्णु बलिके अधिकारसे त्रिलोकीका राज्य ले लेना चाहते थे; अत: उन्होंने तीन पग भूमिके लिये याचना करके उनसे भूमिदान ग्रहण किया और तीनों लोकोंको आक्रान्त करके उन्हें पुन: देवराज इन्द्रको लौटा दिया। महातेजस्वी श्रीहरिने अपनी शक्तिसे बलिका निग्रह करके त्रिलोकीको पुन: इन्द्रके अधीन कर दिया॥ २०-२१॥