1-Balkand / Sarga 29
Shloka 20
Shloka
त्रीन् पदानथ भिक्षित्वा प्रतिगृह्य च मेदिनीम् ।आक्रम्य लोकाँल्लोकार्थी सर्वलोकहिते रतः ॥१-२९-२५॥
Sarga 29 / Shloka 20 Balkand