1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 29 / Shloka 16 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 29
Shloka 16

Balkand

77 Sarga
31 Shloka
1/29/16
1-Balkand / Sarga 29 Shloka 16
Shloka
वरं वरद सुप्रीतो दातुमर्हसि सुव्रत ।
पुत्रत्वं गच्छ भगवन्नदित्या मम चानघ ॥१-२९-१६॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘भगवान्‌का यह वचन सुनकर मरीचिनन्दन कश्यपने कहा—‘उत्तम व्रतका पालन करनेवाले वरदायक परमेश्वर! सम्पूर्ण देवताओंकी, अदितिकी तथा मेरी भी आपसे एक ही बातके लिये बारम्बार याचना है। आप अत्यन्त प्रसन्न होकर मुझे वह एक ही वर प्रदान करें। भगवन्! निष्पाप नारायणदेव! आप मेरे और अदितिके पुत्र हो जायँ॥ १५-१६॥