1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 29 / Shloka 15 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 29
Shloka 15

Balkand

77 Sarga
31 Shloka
1/29/15
1-Balkand / Sarga 29 Shloka 15
Shloka
तच्छ्रुत्वा वचनं तस्य मारीचः कश्यपोऽब्रवीत् ।
अदित्या देवतानां च मम चैवानुयाचितम् ॥१-२९-१५॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘भगवान्‌का यह वचन सुनकर मरीचिनन्दन कश्यपने कहा—‘उत्तम व्रतका पालन करनेवाले वरदायक परमेश्वर! सम्पूर्ण देवताओंकी, अदितिकी तथा मेरी भी आपसे एक ही बातके लिये बारम्बार याचना है। आप अत्यन्त प्रसन्न होकर मुझे वह एक ही वर प्रदान करें। भगवन्! निष्पाप नारायणदेव! आप मेरे और अदितिके पुत्र हो जायँ॥ १५-१६॥