1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 28 / Shloka 21 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 28
Shloka 21

Balkand

77 Sarga
22 Shloka
1/28/21
1-Balkand / Sarga 28 Shloka 21
Shloka
तव यज्ञस्य विघ्नाय दुरात्मानो महामुने ।
भगवंस्तस्य को देशः सा यत्र तव याज्ञिकी ॥१-२८-२१॥

Bhashya Content For This Shloka

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

भगवन्! मुझे सब कुछ बताइये। यह किसका आश्रम है? भगवन्! महामुने! जहाँ आपकी यज्ञक्रिया हो रही है, जहाँ वे पापी, दुराचारी, ब्रह्महत्यारे, दुरात्मा राक्षस आपके यज्ञमें विघ्न डालनेके लिये आया करते हैं और जहाँ मुझे यज्ञकी रक्षा तथा राक्षसोंके वधका कार्य करना है, उस आपके आश्रमका कौन-सा देश है? ब्रह्मन्! मुनिश्रेष्ठ प्रभो! यह सब मैं सुनना चाहता हूँ’॥ २०—२२॥