1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 28 / Shloka 20 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 28
Shloka 20

Balkand

77 Sarga
22 Shloka
1/28/20
1-Balkand / Sarga 28 Shloka 20
Shloka
सर्वं मे शंस भगवन् कस्याश्रमपदं त्विदम् ।
संप्राप्ता यत्र ते पापा ब्रह्मघ्ना दुष्टचारिणः ॥१-२८-२०॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘भगवन्! मुझे सब कुछ बताइये। यह किसका आश्रम है? भगवन्! महामुने! जहाँ आपकी यज्ञक्रिया हो रही है, जहाँ वे पापी, दुराचारी, ब्रह्महत्यारे, दुरात्मा राक्षस आपके यज्ञमें विघ्न डालनेके लिये आया करते हैं और जहाँ मुझे यज्ञकी रक्षा तथा राक्षसोंके वधका कार्य करना है, उस आपके आश्रमका कौन-सा देश है? ब्रह्मन्! मुनिश्रेष्ठ प्रभो! यह सब मैं सुनना चाहता हूँ’॥ २०—२२॥