1-Balkand / Sarga 28
Shloka 20
Shloka
सर्वं मे शंस भगवन् कस्याश्रमपदं त्विदम् ।संप्राप्ता यत्र ते पापा ब्रह्मघ्ना दुष्टचारिणः ॥१-२८-२०॥
Sarga 28 / Shloka 20 Balkand