1-Balkand / Sarga 28
Shloka 19
Shloka
निःसृताःस्मो मुनिश्रेष्ठ कान्ताराद् रोमहर्षणात् ।अनया त्ववगच्छामि देशस्य सुखवत्तया ॥१-२८-१९॥
Sarga 28 / Shloka 19 Balkand