1-Balkand / Sarga 28
Shloka 15
Shloka
अथ ते राममामन्त्र्य कृत्वा चापि प्रदक्षिणम् ।एवमस्त्विति काकुत्स्थमुक्त्वा जग्मुर्यथागतम् ॥१-२८-१५॥
Sarga 28 / Shloka 15 Balkand